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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

Manjulikaa


खुशबू जब भी हवा से 
उसका पता पूछा करती 
हवा भी उस 
घर के फूलो से मिला करती 
तन्हाई में खिली
रात रानी
अक्सर ही 
उसके घर पर मिला करती 
वेसे तो हंसती थी बेवजह 
आज मुस्कराने पर भी
क्यों सोचा करती ?


मंजुल भटनागर


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